मैं गर्मी की छूट्टीयों मैं अपनी भुआ जी के पास चला जाता था एक महिने पूरी मौज-मस्ती करते भुआ के पड़ौस में सरोज चाची जी रहते थे । जो भुआ जी की अच्छी सहेली थी भुआ जी के साथ एक-दो बार हमारे घर आये हुये थे। वो हमारे परिवार से अच्छी तरह से वाकिफ थे, मेरे को अपने सगे बेटे जैसा मानते थे ।मैं भी भुआ जी ओर सरोज चाची जी में कोई फर्क नही देखता था , चाचा जी भी फूंफा जी के अच्छे दोस्त थे सगे भाई जैसे ।दोनो परिवार एक ही सूत्र पर जीते जो तेरा है वो मेरा ,जो मेरा है वो तेरा ।रोहन भुआ जी का लड़का सरोज चाची जी की बिटिया रेणू के साथ ही पढता था ।
रेणू जब छोटी सी थी प्यारी सी गुड़ीया हमारे साथ खेलती थी ना मेरे सगी बहिन थी ओर ना ही भुआ जी के लड़की थी तो प्यार मिलना तो स्वभाविक सी बात है । मेरे लिये वो हर रक्षाबंधन पर राखी भेजती थी ,मैं भी उपहार भेजता था। मैं अपनी स्नातकोत्तर करने विदेश (कनाडा)चला गया ,मुझे भारत सरकार की ओर से फेलोसिप मिली थी ,पढाई पुरी होते ही मेरी वहां पर ही अच्छी नौकरी लग गई थी मैं वहीं से हाल-चाल पूछता रहता सबके मैं कई साल बाद विदेश (कनाडा)से आया । मैं भुआ जी के पास गया सबकुछ बदल गया था शक्लें भौतिक परिवेश पर जो प्यार प्रेम था अब वही था दस साल बाद ,मेरे जाते ही सब खुश हुये मेरे आने की खबर किसी को नही थी । एक उत्सव से कम नही था माहौल ,खाना-पीना हुआ बातें चलने लगी मैनें अपनी सुनाई उन सब ने अपनी-अपनी मैं मैंने चाची से कहा था रेणू की शादी क्यों नही कर देते अब आप, रेणू की उम्र भी हो गई है शादी लायक और अब सरकारी महकमे नौकरी भी तो लग गई है ।चाची बोली आप सही कह रहे हो बेटा ,अभी अच्छा लड़का देख रहे हैं । दो-चार जगह देखा पर कहीं लड़का पसंद ना आया कहीं पर घर - परिवार ,ये भी तो देखनें पड़ते है ।चाची भी सही कह रही थी आखिर रिस्ते भी तो सात पीढीयों की दोस्ती होती है ,सोच-विचार गहन-जांच परख के बाद ही निर्ण्य लिया जाता है ।रेणू इकलोती सन्तान जो थी चाचा-चाची की रेणू को एक बगीचे की तरह सिंचा ।रेणू को अच्छे संस्कार दिए पैसे और भौतिकता से रेणू हमेशा दूर रही बचपन से ही पढाई से दोस्ती कर ली थी। रेणू का चाचा-चाची ने पुरा ख्याल रखा हर आवश्यकता को पुरा किया , अच्छी शिक्षा दिलाई। रेणू भी अपने माता-पिता की मेहनत को बेकार ना जाने दिया ,रेणू की मेहनत रंग लायी सरकारी अध्यापिका लग गयी है पास ही के गाँव में ड्यूटी आ गयी । चाचा-चाची के त्याग का सीला मिला ।चाचा जी ने रेणू को एक्टिवा दिला दी जिससे रेणू को आने-जाने में कोई परेशानी ना आये।
रेणू राजपत्रित अधिकारी बनना चाहती थी ,तो अध्यापिका बनने के बाद भी रेणू ने पढाई जारी रखी। माता जी का घर के काम में सहयोग करती । मौहल्ले के लोग ओर रिस्तेदार अपने बच्चों को रेणू की मिसाल देते थे। रेणू सादगी की मिसाल ,मिलनसार सबके दिलों में अपना एक कोना ।जब भी हम एक साथ बैठते तो सबके दु:ख सुख की चर्चा कुरीतियों पर तो यूँ बरसती क्या कहूँ ।मेरी कलाई को सौभाग्य मिला था रेणू जैसी बहिन की राखी बंधती थी । रेणू बोली मेरी शादी में नही आया तो समझो राखी नही आयेगी भाईजी मैं वादा किया पक्का आऊँगा तेरे लिये ढेरों उपहार भी चाचा-चाची भी बोले आना बेटा तेरे को ओर रोहन को ही पुरे काम संभालने है भुआ जी बोले आयेगा नही तो जायेगा कहां ये कह सब ने मन कच्चे कर लिये मैं भी रोक ना पाया । मेरे को जल्दी वापस जाना था तो इसलिये दो दिन रुक मैं चला गया ।समाचार मिला रेणू के लिये लड़का देख लिया है ।राजपत्रित अधिकारी है ,खुब पढा लिखा ,अच्छा परिवार है ,अच्छी जमीन जायदाद है । 10 जनवरी को शादी है मेरे को उस दिन भी इतनी खुशी नही हुई थी जब मेरे को फेलोसिप मिली थी । मैनें रेणू को बधाई ओर उपहार भेजे । मेरे को यहां आये हुये चार महिने ही हुये थे ।मैनें कोशिशें शुरु कर दी थी …मेरे को आश्वासन मिलते रहे। जैसे वक्त नजदीक आता गया ।मेरी मेहनत के चारों ओर पानी लग चुका था । आखिर पानी फिर गया ,ओर लाखों कोशिशें बेकार गयी यहां तक की मेरा नौकरी छोड़ने का प्रस्ताव भी ना मंजूर कर दिया । जनवरी लगते ही फोन शुरु हो गये रेणू ,भुआ जी,चाचा जी ,सरोज चाची जी के सभी को बोला आ रहा हूँ बहाने भी खत्म हो जाते हैं ।साहस जुटा कर दो दिन पहले रोहन से बोला मैं नही पहुँच पाऊँगा राम कहानी गायी। वो समझ गया मान गया मैनें कहा बता देना ,उसका भी मन कच्चा हो गया । कई रात सो ना पाया काम में मन ना लगा।खुद को बताना खुद ही सुनना को सुने, कोन जाने ।धीरे-धीरे सब सामान्य हो गया ,एक दिन ओफिस में बैठा खुद की ई-मेल चैक कर रहा था रेणू का मेल ,भाई जी मैं जानती हूँ आप नही आ पाये । रोहन ने आपकी गैरहाजिरी में सब संभाल लिया ,आपको हम सभी ने बहुत मिस किया ,मुझे एक भाई की कमी महसूस नही होने दी ,आपकी कमी हमे खली आप होते तो …बहिन की खुशी में भाई जितने हो उतने ही कम होते हैं । मेरे को अच्छा ससुराल मिल गया है सभी मेरे को बहुत प्यार करते हैं । मुझे मेरे माता-पिता की कमी महसूस नही होने देते है यहां मैं अपनी पढाई भी आराम से कर सकती हूँ कोई रोक-टौक नही हैं । बहुत समझदार लोग हैं आपके जीजू भी मुझे बहुत प्यार करते हैं । उनको किसी भी प्रकार की लत नही हैं । हमारे परिवार में आपके जीजू ,मेरी एक नन्द ,मेरी सास ,मेरे ससुर ,दो नौकर हैं । आप जल्दी आना भाई जी ओर सीधे यहीं आना हम यहीं से गाँव चलेंगे । मैं बहुत खुश हूं भाई जी ,अभी स्कूल जा रही हू ओर बाद में लिखती हूं …………
बहुत अच्छी कहानी बन पड़ी है .....आगे पढ़ने की उत्सुकता हो रही है
ReplyDeletejald hi puri kahani padhane ko milegi ...16 june ke baad
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