Sunday, 19 May 2013


मुझे दबा दो ,गहरे गढ्ढों में
सुला दो कंटीले बिस्तरों में
रख दो पत्थर मुझ पर …

रख देना जमीन की आखरी सतह में
कल को याद ना आये मेरी
आते-जाते किसी को नजर ना आये
मेरी छोटी सी देह …

दिख गयी मैं आते-जाते
तोहिन बड़ी होगी तुम्हारी

राहत दे तुमको मेरी
 ये छोटी सी जिन्दगी
राहों पर आये तुम्हारी जिंदगी
मुझे मिटाने से

खुशी मेरी और क्या होगी ज्यादा

तुम्हारे लिये तो हजार जन्म भी कम है मेरे…

गीला तुम से नही है उस कोख से है
बदला लिया होगा मुझसे किसी गहरी रंजिश का

या मुझसे गहरा है उससे रिस्ता मेरे भाई का…
दिन वो दूर नहीं है हालात ये रहे तो…

सुरज की रोशनी चाँद की चाँदनी
महकती हवा मीठा पानी नसीब ना होगा
मेरा ही नाम पृथ्वी 

है……तुम्हारे लिये मैं बेटी…………BENIWAL

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