तपती रेत में …
दुर-दुर तक ना छाँव ,ना पानी
चढता सुरज …
एक सूखे पेड़
के तने के सहारे
घास- फूस की गोल
आकृति में…
तीन सफेद अण्डे …पेड़ की
इंतजार जैसे होता है सूखे तालाब को
बरसात का उसे इंतजार बस
कठोर परत हटने का …
सोयी नही वो कितनी अनमोल रातों में
नींद झलक रही है उसकी आँखों में
वो उसका घर था मैं राही उस रास्ते का
बढ आया मैं …
अपने घर की ओर …
फिर जाना हुआ उसी रास्ते से …
कुछ ले गया अपने घर से अनाज और पानी
आज शान्त ना थी वो
चक्कर पेड़ के चारों ओर्…
कुछ तो हुआ है …अनहोनी शायद
साहस जुटा कर पास पहुँचा
देख कर शतबद रह गया …
एक फूटा हुआ …एक गायब …
तीसरे पर खरोंचें …
मेरे सिर पर मंडराने लगी जोर-जोर से चिल्लाकर
अब टिटूड़ी
मंडराये भी क्यों ना
घटा भी कुछ ऐसा …कहाँ गलत वो बेचारी
मैंने तो जिद्द ना की …हट गया चुग्गा रख कर
कुछ घटा था उसके साथ तभी तो यहाँ आयी थी
वो भी जानती थी बाग-बगीचों का रास्ता
यहाँ भी आ गये …तपस्या भंग करने …
कुछ दिन बाद जाना हुआ …
नीचे पेड़ के नजरों को कुछ ना दिखा
मैनें सोचा क्या हुआ होगा …कहाँ गये दोनों अब
दिल तो यही बोला जहाँ भी रहे खुश रहे …
एक आवाज सुनी शायद यही कि ना हम अब उपर है
चुजे को कुछ खिला रही थी …वो अपनी चोंच से
कुछ पल मेरी ओर देख दोनों उड़ गये …
देखता रहा ………आज तक ना आये वापस ………………॥ BENIWAL
दुर-दुर तक ना छाँव ,ना पानी
चढता सुरज …
एक सूखे पेड़
के तने के सहारे
घास- फूस की गोल
आकृति में…
तीन सफेद अण्डे …पेड़ की
एक टहनी पर पहरा टिटूड़ी का…
टकटकी आकृति पर लगाये …
इंतजार जैसे होता है सूखे तालाब को
बरसात का उसे इंतजार बस
कठोर परत हटने का …
सोयी नही वो कितनी अनमोल रातों में
नींद झलक रही है उसकी आँखों में
वो उसका घर था मैं राही उस रास्ते का
बढ आया मैं …
अपने घर की ओर …
फिर जाना हुआ उसी रास्ते से …
कुछ ले गया अपने घर से अनाज और पानी
आज शान्त ना थी वो
चक्कर पेड़ के चारों ओर्…
कुछ तो हुआ है …अनहोनी शायद
साहस जुटा कर पास पहुँचा
देख कर शतबद रह गया …
एक फूटा हुआ …एक गायब …
तीसरे पर खरोंचें …
मेरे सिर पर मंडराने लगी जोर-जोर से चिल्लाकर
अब टिटूड़ी
मंडराये भी क्यों ना
घटा भी कुछ ऐसा …कहाँ गलत वो बेचारी
मैंने तो जिद्द ना की …हट गया चुग्गा रख कर
कुछ घटा था उसके साथ तभी तो यहाँ आयी थी
वो भी जानती थी बाग-बगीचों का रास्ता
यहाँ भी आ गये …तपस्या भंग करने …
कुछ दिन बाद जाना हुआ …
नीचे पेड़ के नजरों को कुछ ना दिखा
मैनें सोचा क्या हुआ होगा …कहाँ गये दोनों अब
दिल तो यही बोला जहाँ भी रहे खुश रहे …
एक आवाज सुनी शायद यही कि ना हम अब उपर है
चुजे को कुछ खिला रही थी …वो अपनी चोंच से
कुछ पल मेरी ओर देख दोनों उड़ गये …
देखता रहा ………आज तक ना आये वापस ………………॥ BENIWAL
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